जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर के मानसरोवर इलाके में रविवार को आध्यात्मिक ऊर्जा का अनूठा संगम देखने को मिला। शिवयोग के आचार्य डॉ. ईशान शिवानंद के सानिध्य में आयोजित 'ललिता-रूद्र त्रिशती (लेवल-3)' दीक्षा कार्यक्रम में देशभर के विभिन्न राज्यों से आए 2000 से अधिक साधकों ने हिस्सा लिया।
300 दिव्य बीज मंत्रों की मिली दीक्षा
कार्यक्रम के दौरान आचार्य डॉ. ईशान शिवानंद ने साधकों को मां ललिता त्रिपुर सुंदरी और भगवान रुद्र के 300 दिव्य बीज मंत्रों की दीक्षा दी। इस दीक्षा समारोह में भजन, गहन ध्यान और विशेष साधना कराई गई, जिसके जरिए साधकों ने आत्मबोध और आंतरिक शांति का अनुभव किया।
"महादेव का हाथ थामने से दूर होंगे संकट"
सभा को संबोधित करते हुए आचार्य ने कहा कि आधुनिक जीवन संघर्षों और अनिश्चितताओं से भरा है। उन्होंने जोर देकर कहा, "जब मन स्थिरता तलाशता है, तब साधना ही एकमात्र सहारा बनती है। यदि साधक महादेव का हाथ पकड़ कर रखेगा, तो वह जीवन की हर कठिन परिस्थिति से आसानी से बाहर निकल सकता है।"
तनाव और डिजिटल थकान से मिलेगा छुटकारा
आचार्य ने बताया कि आज के दौर में लोग 'डिजिटल ओवरलोड' और मानसिक थकान का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में यह प्राचीन साधना न केवल आध्यात्मिक शक्तियों को जागृत करती है, बल्कि व्यक्ति को मानसिक और सामाजिक संतुलन बनाने में भी मदद करती है। उन्होंने कहा कि हर साधक शिव की संतान है और अपनी चेतना के विस्तार से वह सुप्त शक्तियों को जगा सकता है।
शांति और आनंद का माहौल
मानसरोवर स्थित सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में चारों ओर भक्ति का माहौल रहा। साधकों ने बताया कि इस साधना शिविर से उन्हें जीवन में स्पष्टता, मानसिक स्थिरता और गहरी आंतरिक शांति महसूस हुई है।
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