दौसा में प्रभारी मंत्री की चौपाल में 'अंधेरगर्दी': समस्याओं की सुनवाई के बीच गुल हुई बत्ती; कर्नल राज्यवर्धन के सामने मोबाइल टॉर्च के सहारे अधिकारी

दौसा। राजस्थान सरकार के उद्योग एवं जिला प्रभारी मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की रात्रि चौपाल में सोमवार को उस समय अजीबो-गरीब स्थिति पैदा हो गई, जब मंत्री जी जनता की समस्याएं सुन रहे थे और अचानक पूरा इलाका अंधेरे में डूब गया। दौसा के पांचोली गांव में आयोजित इस कार्यक्रम में बिजली गुल होने से करीब 15 मिनट तक अफरा-तफरी का माहौल रहा।

जनरेटर ने दिया धोखा, मोबाइल टॉर्च का सहारा यह घटना रात करीब 8 बजे पांचोली स्थित गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल के खेल मैदान में हुई। कार्यक्रम के लिए बिजली की व्यवस्था स्कूल लाइन के बजाय जनरेटर से की गई थी। जनरेटर में अचानक आई तकनीकी खराबी के कारण लाइट बंद हो गई। मंच पर मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़, विधायक विक्रम बंशीवाल और जिला कलेक्टर सहित तमाम बड़े अधिकारी मौजूद थे। अंधेरा छाते ही सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों ने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर व्यवस्था संभालने की कोशिश की।

जब मंत्री ने IMA अध्यक्ष को बीच में ही टोका चौपाल के दौरान एक दिलचस्प वाकया तब हुआ जब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के जिलाध्यक्ष डॉ. उमेश शर्मा अपनी बात रख रहे थे। डॉ. शर्मा ने आरजीएचएस (RGHS) योजना की कमियां गिनाईं और जिला प्रशासन को इस चौपाल के आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। इस पर मंत्री राठौड़ ने उन्हें बीच में टोकते हुए कहा, "मैंने बुलाया है, किसी और ने नहीं।" मंत्री के इस सीधे प्रहार के बाद डॉक्टर ने अपनी बात संभाली और चिकित्सा जगत की समस्याओं पर ध्यान आकर्षित किया।

किसानों और डॉक्टरों ने रखी अपनी मांगें

  • कृषि प्रोत्साहन: प्रगतिशील किसान गिरिराज मीणा और रामजीलाल शर्मा ने कृषि योजनाओं को धरातल पर अधिक प्रभावी बनाने की मांग की।

  • डॉक्टरों की समस्याएं: सरकारी डॉक्टर एसोसिएशन की ओर से डॉ. कपिलदेव मीणा ने चिकित्सकों के रिक्त पदों और कार्यस्थल पर आने वाली चुनौतियों के समाधान की अपील की।

चौपाल में जिला परिषद सीईओ बिरदीचंद गंगवाल, एसडीएम नवनीत कुमार और भाजपा जिला महामंत्री लेखपाल कसाना सहित दर्जनों जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे। संचालन डॉ. रामवीर चौधरी ने किया।


निष्कर्ष:

दौसा की यह रात्रि चौपाल समस्याओं के समाधान से ज्यादा बिजली गुल होने और मंत्री की तल्खी के कारण चर्चा में आ गई। हालांकि, मंत्री ने अंधेरे के बावजूद जनता से संवाद जारी रखा, लेकिन प्रदेश की वीआईपी जनसुनवाई में बैकअप की ऐसी नाकामी जिला प्रशासन की तैयारियों पर सवालिया निशान जरूर लगाती है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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