राजस्थान में सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी दल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के बीच राजनैतिक विवाद अब पूरी तरह सड़कों और सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आया है। आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल द्वारा कानून व्यवस्था, किसानों के मुद्दों और स्थानीय प्रशासनिक विसंगतियों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद से ही दोनों दलों के बीच जुबानी जंग बेहद तेज हो गई है। इस बड़े राजनैतिक घटनाक्रम के बीच सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पूरी तरह से शांत नजर आ रही है।
राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि जाट बाहुल्य क्षेत्रों और ग्रामीण राजस्थान में अपनी सियासी जमीन को मजबूत बनाए रखने के लिए दोनों ही दल इस वक्त अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं, जिससे प्रदेश का राजनीतिक वातावरण गरमा गया है।
टकराव की मुख्य वजह:
राजस्थान में भाजपा और आरएलपी के बीच अचानक टकराव की मुख्य वजह आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल का मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राज्य सरकार पर दिया गया विवादित बयान है। इस बयान के बाद दोनों पार्टियों के बीच राजनीतिक माहौल गरमा गया और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को विरोध का सामना करना पड़ा।
सांसद हनुमान बेनीवाल का विवादित बयान:
जयपुर के पास दूदू जिले के भैराणा धाम में आयोजित महापंचायत में हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उनके मंत्रिमंडल के लिए तीखी और अमर्यादित शब्दावली का इस्तेमाल किया।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का पलटवार:
बेनीवाल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मदन राठौड़ ने कहा कि राजनेताओं का शब्दकोश खत्म हो गया है और वे सोशल मीडिया पर टीआरपी और सुर्खियां बटोरने के लिए अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने जनता और मीडिया से अपील की कि ऐसे नेताओं का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए।
सड़क पर प्रदर्शन और टकराव:
आरएलपी समर्थकों ने कुचामन में मदन राठौड़ के काफिले को रोककर काले झंडे दिखाए, सरकार विरोधी नारे लगाए और तख्तियां दिखाकर विरोध जताया। पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
जयपुर में राजस्थान यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर आरएलपी कार्यकर्ताओं और छात्र संघ के युवाओं ने भाजपा नेतृत्व के खिलाफ बड़े प्रदर्शन किए।
कांग्रेस की मूकदर्शक भूमिका:
इस पूरे सियासी टकराव के दौरान कांग्रेस पार्टी पूरी तरह शांत रही। विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस ने भाजपा और आरएलपी के बीच टकराव से संभावित राजनीतिक लाभ उठाने के लिए दूरी बनाई है। कांग्रेस जानती है कि इस संघर्ष से भाजपा कमजोर हो सकती है या वोट बैंक बंट सकता है।
सोशल मीडिया पर भी विवाद:
भाजपा और आरएलपी का मुकाबला केवल सड़कों पर ही नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया पर भी जारी है। दोनों पार्टियों के समर्थक और आईटी विंग सोशल मीडिया पर विरोधी दलों के खिलाफ मीम्स, पुराने बयान और पोस्ट शेयर कर रहे हैं।
इस तरह राजस्थान में भाजपा और आरएलपी के बीच राजनीतिक टकराव राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में नया मोड़ लेकर आया है, जबकि कांग्रेस अपने रणनीतिक दृष्टिकोण से 'वेट एंड वॉच' की नीति पर बनी हुई है।
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