चूरू जिले के चाड़वास और आसपास के क्षेत्रों में टिटहरी पक्षी द्वारा दिए गए तीन अंडों को लेकर ग्रामीणों और किसानों में इस बार के मानसून और फसल उत्पादन को लेकर तरह-तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं। चाड़वास गांव में कुवैत प्रवासी भंवरलाल गोदारा के खेत में पानी से भरे गड्ढे के बीच पत्थर पर टिटहरी ने तीन अंडे दिए हैं, जिन्हें स्थानीय लोग मौसम संकेतों से जोड़कर देख रहे हैं।
ग्रामीणों का मानना है कि टिटहरी के अंडों की संख्या के आधार पर मानसून की स्थिति और फसल उत्पादन का अनुमान लगाया जा सकता है। कुछ लोगों का कहना है कि तीन अंडे होने का अर्थ है कि तीन दिशाओं में अच्छी फसल होगी, जबकि कुछ जानकार इसे मध्यम बारिश और औसत उत्पादन से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं, यह भी माना जाता है कि यदि अंडों की संख्या अधिक होती है तो पूरे मानसून में अच्छी बारिश और बेहतर फसल का संकेत मिलता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार टिटहरी के नर और मादा पक्षी अंडों की सुरक्षा में लगातार लगे रहते हैं। मादा अंडों के पास रहती है, जबकि नर पक्षी आकाश में उड़कर आसपास निगरानी करता है। इस दौरान उसकी तेज उड़ान और आवाज को भी लोग मौसम परिवर्तन से जोड़कर देखते हैं।
मंदिर पुजारी और ग्रामीणों के अनुसार टिटहरी के अंडों के आसपास की स्थिति, उनकी संख्या और स्थान को लेकर पारंपरिक मान्यताएं प्रचलित हैं, जो पीढ़ियों से मौसम और खेती के अनुमान का आधार बनती आई हैं। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से इसकी पुष्टि नहीं है, लेकिन ग्रामीण आज भी इसे मौसम पूर्वानुमान का एक पारंपरिक संकेत मानते हैं।
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