शारदीय नवरात्रि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होती है। इस दौरान घरों और मंदिरों में घटस्थापना, दुर्गा पूजा, व्रत, कन्या पूजन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों को शक्ति उपासना के लिए विशेष माना जाता है।
पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात करीब 9:19 बजे शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात करीब 9:30 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार नवरात्रि का पहला दिन 11 अक्टूबर माना जाएगा।
जयपुर के स्थानीय पंचांग के अनुसार 11 अक्टूबर को घटस्थापना का मुख्य मुहूर्त:
ये समय जयपुर के स्थानीय समय के अनुसार हैं। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के कारण मुहूर्त में कुछ अंतर हो सकता है।
11 अक्टूबर को घटस्थापना के समय चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का प्रभाव रहेगा। पंचांग परंपरा में घटस्थापना के लिए इनका ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। हालांकि उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार आवश्यकता होने पर अभिजीत मुहूर्त में भी घटस्थापना की जा सकती है।
इसलिए घटस्थापना के लिए अपने स्थानीय शहर के पंचांग के अनुसार समय देखना बेहतर रहेगा।
घटस्थापना को कलश स्थापना भी कहा जाता है। इसे नवरात्रि के आरंभ का प्रमुख अनुष्ठान माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कलश में देवी शक्ति का आह्वान किया जाता है और नौ दिनों तक इसकी पूजा की जाती है।
घटस्थापना के लिए सामान्य तौर पर मिट्टी की वेदी बनाकर उसमें जौ बोए जाते हैं। इसके बाद जल से भरा कलश स्थापित किया जाता है। कलश पर आम या अशोक के पत्ते, नारियल और मौली आदि बांधकर देवी का आह्वान किया जाता है।
घटस्थापना के दौरान श्रद्धालु सामान्य रूप से इन चरणों का पालन कर सकते हैं:
ध्यान रखें: अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में घटस्थापना की विधि अलग हो सकती है। धार्मिक अनुष्ठान अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंडित/आचार्य की सलाह के अनुसार करना उचित है।
| तारीख | दिन | देवी स्वरूप |
|---|---|---|
| 11 अक्टूबर | रविवार | मां शैलपुत्री |
| 12 अक्टूबर | सोमवार | मां ब्रह्मचारिणी |
| 13 अक्टूबर | मंगलवार | मां चंद्रघंटा |
| 14 अक्टूबर | बुधवार | मां कूष्मांडा |
| 15 अक्टूबर | गुरुवार | मां स्कंदमाता |
| 16 अक्टूबर | शुक्रवार | मां कात्यायनी |
| 17 अक्टूबर | शनिवार | मां कालरात्रि |
| 18 अक्टूबर | रविवार | मां महागौरी |
| 19 अक्टूबर | सोमवार | मां सिद्धिदात्री/नवमी पूजन |
पंचांग गणना के अनुसार 19 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी, महागौरी पूजा और महानवमी से जुड़े अनुष्ठान होंगे, जबकि 20 अक्टूबर को नवमी होम, नवरात्रि पारण, दुर्गा विसर्जन और विजयादशमी के पर्व होंगे।
नवरात्रि के बाद 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। जयपुर के लिए विजय मुहूर्त दोपहर 2:06 बजे से 2:51 बजे तक बताया गया है।
शारदीय नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना, व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष माने जाते हैं। देशभर में मंदिरों में विशेष पूजा के साथ-साथ गरबा, रामलीला और अन्य धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
नोट: पूजा और मुहूर्त के समय शहर के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। ऊपर दिए गए घटस्थापना समय जयपुर के लिए हैं।
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